हिंदी में दुखद शायरी के हमारे संग्रह में आपका स्वागत है। यहाँ, आपको दिल को छू लेने वाली कविताएँ मिलेंगी जो दुखद भावनाओं का सार पकड़ती हैं। इन खूबसूरत शायरियों को पढ़ने और अपने प्रियजनों के साथ साझा करने का आनंद लें।
खुशियों की तलाश में हम निकले थे घर से,
दर्द ही मिला है हर डगर पर।
दिल टूटा है इस कदर आज,
कोई टुकड़ा भी जुड़ता नहीं दिखता।
आँखों में नमी, लबों पे खामोशी,
ये कैसा दर्द है जो कहता नहीं जाता।
रातें गुजरती हैं तन्हाई में,
दिन ढलता है उदासी में।
हर साँस दर्द देती है अब,
जिंदगी बोझ बन गई है।
हँसना भूल गए हैं हम कब से,
मुस्कुराहट भी अब बेगाना है।
यादें तेरी सताती हैं रात भर,
नींद आती नहीं, बस आँसू बहते हैं।
खुशियों से दूर हो गए हैं हम,
गमों के साये में खो गए हैं हम।
जिंदगी एक सजा बन गई है,
जीने की अब कोई वजह नहीं रही।
दिल में एक तूफ़ान सा है मचा,
बाहर से शांत हूँ, अंदर से टूटा हुआ।
खुशियों की तलाश में निकले थे घर से,
दुखों का साया मिला हर जगह।
दिल में उदासी छाई है गहरी,
मुस्कुराहट भी अब बोझ लगती है।
आँखों से बहते आँसू रुकते नहीं,
दर्द की दास्ताँ लिखते नहीं बनती।
टूटे हुए ख्वाबों का गम है,
जिंदगी अब बस एक सवाल है।
यादें तेरी सताती हैं हर पल,
तेरे बिना जीना मुश्किल है।
दुनिया की भीड़ में तन्हा हूँ मैं,
अपने ही साये से डरता हूँ मैं।
कोई नहीं समझता मेरे दर्द को,
सब कहते हैं, ये वक्त भी गुजर जाएगा।
हँसता हुआ चेहरा दिखाता हूँ सबको,
अंदर ही अंदर टूट रहा हूँ मैं।
खामोशियों में डूबा रहता हूँ अब,
शब्दों से दर्द बयाँ नहीं होता।
जिंदगी एक उलझी हुई पहेली है,
जिसका हल ढूँढता रहता हूँ मैं।
दिल में एक दर्द सा उठता है,
खुशियों का रंग फीका पड़ता है।
आँखों में नमी, लबों पे ख़ामोशी,
कहानी कुछ अधूरी सी, बेबसी।
टूटे हुए ख्वाबों का गम है,
जिंदगी एक बोझ सा लगता है।
यादें तेरी चुभती हैं काँटों सी,
रातें गुजरती हैं सिसकियों में रोटी सी।
मन उदास है, तनहा सा है,
कोई अपना नहीं, ये एहसास है।
हँसी भी अब बेरंग लगती है,
दुनिया भी अब बेगान लगती है।
दिल में एक खालीपन सा है,
जैसे कोई अपना खो गया सा है।
ज़ख्म गहरे हैं, दर्द बहुत है,
फिर भी मुस्कुराना मजबूत है।
आँसू भी अब सूख गए हैं,
हम भी अब टूट गए हैं।
जिंदगी की राहों में अकेले हैं,
हम दर्द के साये में घिरे हैं।
खुशियों की तलाश में निकले थे घर से,
दर्द ही मिला हर मोड़ पर हमसे।
दिल में उदासी छाई है ऐसी,
मुस्कुराना भी अब भूल गए जैसे।
आँखों में नमी, लबों पे खामोशी,
कहानी दर्द की है बस इतनी सी।
टूटे हुए ख्वाबों का बोझ है भारी,
ज़िंदगी लगती है अब एक बेसुध डगरी।
यादें तेरी चुभती हैं सीने में काँटों सी,
अब तो हर साँस में है बस तेरी ही कमी।
अकेलेपन का साया है साथी मेरा,
खो गया हूँ मैं खुद से भी कहीं खो कर तेरा।
दुनिया की भीड़ में भी तन्हा हूँ मैं,
अपने ही ग़म में डूबा रहता हूँ मैं।
कोई नहीं समझता मेरे दर्द की गहराई,
बस मुस्कुरा कर छुपा लेता हूँ हर तन्हाई।
दिल टूटा है मेरा पर आवाज़ नहीं आती,
चुपचाप सह लेता हूँ ये दर्द की घड़ी आती।
ज़िंदगी एक सफ़र है ग़मों का,
बस यूँ ही कट रही है मेरी हर शाम का।
दिल टूटा है खामोशी से, कोई आवाज़ नहीं आई,
बस आँखों से बहती रही, धीमी सी एक नदी।
खुशियों की तलाश में, हम खुद को खो बैठे,
गम के साये में अब, हम अकेले हो बैठे।
ज़िन्दगी एक सफ़र है, जिसमें ठोकरें बहुत हैं,
हर ज़ख्म गहरा है, और आँसू भी बहुत हैं।
कहने को बहुत कुछ है, पर लब सील गए हैं,
दर्द के बोझ तले, हम भी झुक से गए हैं।
यादें तेरी चुभती हैं, जैसे काँटे सी चुभें,
इन दर्द भरी रातों में, नींद कहाँ से जुड़े।
उम्मीद की किरण भी, अब धुंधली सी लगती है,
ये ज़िन्दगी भी अब, एक कहानी सी लगती है।
हँसते हुए चेहरों पर, गम का साया पड़ा है,
इस दिल के टुकड़ों को, कौन समेटेगा अब यहाँ।
ख्वाब टूटे हैं सारे, अब हकीकत का सामना है,
इस दर्द भरी दुनिया में, जीना एक तमाशा है।
दिल में एक तूफ़ान है, जो थमता ही नहीं,
इस दर्द की गहराई को, कोई समझता ही नहीं।
आँखों में नमी है, और लबों पे खामोशी,
बस यही है कहानी, मेरी उदास ज़िन्दगी की।
दिल टूटा है इस कदर चुपके से,
आवाज़ भी अब निकलती नहीं है जैसे।
आँखों में नमी, होंठों पे सन्नाटा,
ये कैसा दर्द है जो कम नहीं होता।
उम्मीदों के दीये बुझ गए सारे,
अँधेरे में खो गए हम किनारे।
हँसते हुए चेहरे पे ग़म का पहरा,
कौन समझेगा इस दिल का ज़ख़्म गहरा।
यादें तेरी चुभती हैं काँटों सी,
नींदें उड़ गई हैं रातों सी।
जिंदगी एक सवाल बन गई है,
हर जवाब अधूरा सा रह गया है।
खामोशी में डूबे हैं हम इस कदर,
कोई आवाज़ हमें सुनाई नहीं देती अब।
टूटे हुए ख्वाबों का मलबा है,
जिंदगी अब बस एक सज़ा है।
दर्द की बारिश में भीगते रहे हम,
खुशियों का सूरज कभी नहीं निकला हम पर।
ख़ामोशी में डूबे लफ़्ज़ों का दर्द,
आँखों से बहते आँसुओं का सैलाब।
दिल टूटा है इस कदर चुपके से,
कोई आहट भी न हुई ख्वाब टूटने की।
उदास शाम ढलती है हर रोज़,
यादों के साये गहराते जाते हैं।
कितना कुछ कहना था तुमसे,
पर लब सिले रह गए खामोश।
टूटे हुए दिल की दास्ताँ,
आँसुओं की ज़ुबानी बयाँ।
दर्द का सागर गहरा है इतना,
किनारा ढूँढे ना मिले कहीं।
खुशियों के रंग फीके पड़ गए,
गम के बादल छा गए हर तरफ।
एक अकेलापन सा है महसूस,
भीड़ में भी खोया सा हूँ मैं।
ज़िंदगी की राहों में ठोकरें लगीं,
हर कदम पर दर्द मिला है बस।
मुस्कुराहटें तो बस एक दिखावा हैं,
अंदर ही अंदर टूट रहा हूँ मैं।
खुशियों की तलाश में निकले थे घर से,
दर्द ही मिला है हर डगर से।
दिल में एक दर्द सा उठता है,
कोई अपना सा दूर जाता है।
आँखों से आंसू बहते रहते हैं,
जख्म पुराने क्यूँ नहीं सहते हैं।
हर साँस में दर्द का एहसास है,
ज़िंदगी बस एक उदास एहसास है।
टूटे हुए ख्वाबों का गम है,
जीवन एक बोझ सा बन गया है।
यादें तेरी सताती रहती हैं,
रातें मेरी रुलाती रहती हैं।
खामोशियों में डूबा रहता हूँ,
अपने दर्द में खोया रहता हूँ।
दुनिया की भीड़ में तन्हा हूँ मैं,
अपने ही गमों का साया हूँ मैं।
मुस्कुराहट चेहरे से ओझल है,
दिल मेरा आज बहुत बेकल है।
कोई नहीं समझता मेरे दर्द को,
तन्हा हूँ मैं इस दुनिया के गर्द में।
दिल में एक दर्द सा उठा है,
ख़ामोशी भी अब गूंजने लगी है।